क्या हम वाई-फाई फ़्रीक्वेंसी और ईयरफ़ोन के मैग्नेटिक फ़ील्ड की गिरफ़्त में हैं?

क्या हम वाई-फाई फ़्रीक्वेंसी और ईयरफ़ोन के मैग्नेटिक फ़ील्ड की गिरफ़्त में हैं?

आज की दुनिया पूरी तरह वायरलेस हो चुकी है। मोबाइल, वाई-फाई, ब्लूटूथ, ईयरफ़ोन—हर तरफ़ अदृश्य तरंगें (waves) मौजूद हैं। सवाल यह नहीं है कि ये तरंगें हैं या नहीं, सवाल यह है कि इनका हमारे मन, व्यवहार और एकाग्रता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
अदृश्य तरंगें, लेकिन वास्तविक असर

वाई-फाई रेडियो फ़्रीक्वेंसी पर काम करता है। ईयरफ़ोन और हेडसेट में छोटे-छोटे मैग्नेट और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते हैं। ये सभी मिलकर हमारे चारों ओर एक ऐसा वातावरण बना देते हैं जिसमें दिमाग़ को लगातार संकेत (signals) मिलते रहते हैं।

कई लोगों को यह अनुभव होता है कि:
ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है
मन बेचैन रहता है
बिना वजह थकान या चिड़चिड़ापन महसूस होता है
शांति से बैठना या “सांतचित” होना कठिन लगता है

 यह ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति पर असर एक-सा हो, लेकिन संवेदनशील लोगों के लिए यह प्रभाव ज़्यादा महसूस हो सकता है।

जब हमारी अपनी ‘वेव्स’ बिगड़ने लगती हैं, 
मानव शरीर भी एक तरह की ऊर्जा प्रणाली है। हमारा दिमाग़, दिल और नर्वस सिस्टम इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स पर ही काम करते हैं। जब बाहर से लगातार अलग-अलग फ़्रीक्वेंसी आती रहती हैं, तो यह संभव है कि:
हमारी प्राकृतिक लय (natural rhythm) प्रभावित हो, मानसिक शांति में बाधा आए, व्यवहार में असंतुलन दिखे, यही कारण है कि आज बहुत से लोग कहते हैं—
“सब कुछ होते हुए भी मन शांत नहीं है"।क्या समाधान है?

डरने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन सचेत रहने की ज़रूरत ज़रूर है।

कुछ छोटे लेकिन उपयोगी कदम:
1. लगातार ईयरफ़ोन लगाने से बचें
2. सोते समय वाई-फाई बंद रखें
3. दिन में कुछ समय डिजिटल डिटॉक्स करें
4. प्रकृति के बीच समय बिताएँ
5. ध्यान, प्राणायाम या शांत बैठने की आदत डालें

ये उपाय तरंगों को रोकते नहीं, लेकिन हमारी आंतरिक स्थिरता को मज़बूत ज़रूर करते हैं।
अंत में यह कहना शायद अतिशयोक्ति होगी कि सारी समस्याओं की जड़ सिर्फ़ वाई-फाई या ईयरफ़ोन हैं, लेकिन यह भी सच है कि लगातार बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक शोर हमारे जीवन की शांति को प्रभावित कर रहा है।

आज ज़रूरत है तकनीक से लड़ने की नहीं,
बल्कि तकनीक के साथ संतुलन बनाकर चलने की।

क्योंकि जब मन शांत होगा,
तभी व्यवहार सामान्य होगा,
और तभी जीवन सच में “कनेक्टेड” महसूस होगा—
बिना किसी फ़्रीक्वेंसी के दबाव के।

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