सादगी का सफर

"सादगी का सफर"

जीवन की इस दौड़ में, जहाँ हर कोई बदलने की होड़ में है, वहाँ खुद को वैसा ही बनाए रखना जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं। लोग अक्सर कहते हैं, "तुम अब भी वैसे ही हो, बिल्कुल नहीं बदले!" लेकिन क्या कभी उन्होंने यह सोचा कि यह बदलाव से भी ज्यादा कठिन था?

हर मोड़ पर हालात ने मजबूर किया, समाज ने नए रंग दिखाए, और समय ने अनगिनत इम्तिहान लिए। फिर भी, सादगी को अपनाए रखना, खुद के मूल स्वभाव को बचाए रखना, अपने आप में एक संघर्ष है। यह वही संघर्ष है, जो दिखता नहीं, पर भीतर कहीं चलता रहता है—हर दिन, हर पल।

बदलाव का दबाव हर ओर से आता है—कभी रिश्तों में, कभी समाज में, तो कभी अपने ही भीतर से। पर जो खुद से समझौता नहीं करता, वही अपने असली रूप में टिक पाता है। सादगी सिर्फ एक आदत नहीं, यह एक चुनाव है—हर दिन, हर परिस्थिति में।

तो हाँ, मैं नहीं बदला, क्योंकि मैंने चुना है कि मैं वही रहूँ, जो हूँ। और यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि मेरा सबसे बड़ा हौसला है।

Comments

Popular Posts