जीवन यात्रा
“जीवन का असली मज़ा मंज़िल में नहीं, सफ़र में छुपा होता है…” जीवन भी एक यात्रा ही तो है। जब हम किसी मंज़िल की ओर बढ़ते हैं, तो हर दिन में एक उत्साह होता है, हर कदम में एक उम्मीद होती है। रास्ते की ठोकरें हमें मज़बूत बनाती हैं, मोड़ हमें सिखाते हैं कि दिशा बदलना हार नहीं, समझदारी है। लेकिन जैसे ही हम मंज़िल पर पहुँचते हैं, कुछ पलों के लिए खुशी तो मिलती है… फिर अचानक एक सन्नाटा-सा छा जाता है। वो भाग-दौड़, वो सपने, वो तैयारी—सब जैसे थम जाते हैं। और तब हमें एहसास होता है कि असली आनंद तो उस सफ़र में था, जहाँ हम हर दिन कुछ नया सीख रहे थे, कुछ नया बन रहे थे। मंज़िल सिर्फ़ एक पड़ाव है, अंत नहीं। ठहराव हमें सोचने का मौका देता है, लेकिन ज्यादा देर तक ठहरना हमें भीतर से खाली कर देता है। इसलिए मन फिर से एक नई दिशा खोजता है, एक नई चाहत जगाता है, और हम फिर से किसी नए सफ़र की तैयारी में लग जाते हैं। यात्रा हमें सिखाती है— धैर्य रखना संघर्ष को स्वीकार करना छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करना और सबसे ज़रूरी, खुद को जानना जीवन की खूबसूरती इसी निरंतरता में है। जब तक हम चल रहे हैं, सीख...
